• 15/08/2022 10:17 pm

अरंडी की नई फसल फरवरी-मार्च से आ रही है। इसबार कोरोना के कारन व्यापार कमजोर रहा, जिससे राजकोट जलगांव लाइन में नीचे में 3300/3400 रु प्रति कि्ंवटल होने के बाद अभी भाव 3650/3700 रु प्रति कि्ंवटल हो गये है। पिछले कई दिनों से रूपए की तंगी के होने से बाजार थोड़ा सुस्त है, लेकिन उत्पादक मंडियों में आवक घटने एवं इसके तेल में निर्यातकों की मुंबई, चेन्नई, बेडी- कांदला एवं जामनगर बंदरगाह से लिवाली आने से बाजार बढ़ने लगे है। इसकी नई फसल आने में लंबा समय बाकी है तथा इस बार उत्पादन में औसतन 35% कमजोर होने की खबर आ रही है और कोरोना के कारन खपत में 27% बढ़ गई तथा आगे पेंट उद्योग के साथ-साथ मेडिसीन उद्योग की मांग निकलने की तैयारी है। सभी बातो को देखते हुए वर्तमान भाव की अरंडी में 1000/1200 रु प्रति कि्ंवटल की तेज़ी नई फसल से पूर्व देखने मिल सकती है। वायदे में भी 3900 रु के आसपास अलग-अलग महीनों के भाव चल रहे है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से गुजरात महाराष्ट्र में होता है। गौरतलब रहे कि अरंडी का उत्पादन केवल एशियाई देशों में होता है, क्योकि इसके लिए सर्दी, गर्मी एवं बरसात तीनों तरह के मौसम चाहिए। मेडिसिन उद्योग में अरंडी का उपयोग इतना अधिक होता है ! इसकी खेती बहुत ही कम लागत में अधिक उत्पादकता वाली है, तथा इसमें ग्राहक हर समय में रहते है, क्योकि इसका तेल घरेलू मेडिसीन उपयोग के साथ-साथ निर्यात होता है ज्ञातव्य रहे कि भारत, अरंडी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है क्योकि यहां तीनों मौसम होते है तथा यहां की जमीन अरंडी का उत्पादक के अनुकूल है। यही कारण है कि भारतीय अरंडी के तेल की मांग यूएस, यूएई सहित अन्य यूरोपीय देशों के लिए लगातार रहती है

 

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