• 11/08/2022 8:53 pm

#Share Market Tips: बाजार अगली तेजी के लिए तैयार, जानिए किस स्तर तक पहुंच सकता है निफ्टी

इस हफ्ते की शुरुआत में DOW करीब 27,700 और Nifty लगभग 11,200 के स्तर पर था। पूरे हफ्ते ना सिर्फ यह स्तर बना रहा, बल्कि मामूली तेजी भी देखने को मिली। साफ है कि बाजार अगली तेजी के लिए तैयार हो रहा है। अब हम यह कह सकते हैं कि सितंबर 2020 में DOW 28,500 और Nifty 11,600 के स्तर को पार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही ये अक्टूबर में नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें, तो कोरोना वायरस महामारी के चलते आई बड़ी गिरावट की अब जल्द ही पूरी तरह से भरपाई होने वाली है।

इस तेजी की यह विशेषता है कि यह लॉर्ज-कैप शेयरों के साथ शुरू हुई। अभी निफ्टी के 11,300 के स्तर पर कई लॉर्ज-कैप शेयर काफी कीमत पर हैं और उनके पास और ऊपर जाने के लिए जगह काफी कम है। लेकिन ऐसे कई दूसरे शेयर हैं, जो अभी भी निफ्टी को नई ऊंचाई पर ले जाने में मदद करेंगे। ये आरआईएल, भारती, एसबीआई, लार्सन, टीसीएस, एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक आदि हैं। इस तरह आगे 10 फीसद तक की तेजी आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

लेकिन वास्तविक फोकस मिड कैप पर आ गया है। कई शेयरों में 1000 फीसद तक का उछाल देखा जा चुका है। उदाहरण के तौर पर AARTI DRUGS, Pfaulder और Iol Chemicals आदि में 1000 फीसद की तेजी आई है और कइयों में 1000 फीसद की तेजी आएगी। इसलिए आपको यह समझने की आवश्यकता है कि ऐसा क्यों है?

जब सेबी ने अक्टूबर 2017 में म्युचुअल री क्लासिफिकेशन पर एक सर्कुलर जारी किया था, तब बड़ा सेल ऑफ आया था और सेलर्स डीआईआई, म्युचुअल फंड, रिटेल और मशरूम्ड पीएमएस थे। पूंजी बाजार के इतिहास में पहली बार 90 फीसद मूल्य विनाश देखा गया। यह 40 साल का सबसे बड़ा मूल्य विनाश था। यह सिर्फ दो साल की अवधि में हुआ। यह जून 2018 में शुरू हुआ और कोरोना महामारी के साथ मार्च में खत्म हुआ। 

यह मूल्य विनाश काफी विनाशकारी था। 90 फीसद पूंजी क्षरण होने के कारण कई निवेशक बर्बाद हो गए। 500 से अधिक पीएमएस संस्थाओं का सफाया हो गया। ये 50 रुपये से लेकर 200 करोड़ रुपये तक की पीएमएस थीं। एमएफ और डीआईआई गैर श्रेणियों के शेयरों में किसी भी कीमत पर होल्डिंग्स को समाप्त करने के लिए मजबूर थे। उदाहरण के तौर पर लॉर्ज कैप फंड्स को मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों को बेचना पड़ा और मिड व स्मॉल कैप फंड्स को लॉर्ज कैप शेयरों को बेचना पड़ा। यह चार दशकों की सबसे बड़ा पूंजी विनाश था, जहां निवेशकों ने 90 फीसद पूंजी खो दी। 

बेचना समझ में आता है। निवेशकों और कंपनियों का बर्बाद होना भी समझ आता है। लेकिन यह काफी रोचक है कि सभी शेयरों के कुछ खरीदार थे और वे बेचने के लिए आपके द्वारा डाली गई किसी भी मात्रा को लेने के लिए तैयार थे। यह खरीद लगभग दो वर्षों के लिए थी और साफ-साफ नजर आ रहा था कि खरीदार जबरदस्त मुनाफा कमाएंगे। हम सभी को वैल्यू स्टॉक्स लेने की सलाह दे रहे थे और अपने कॉल को दोहरा रहे थे कि सबसे बड़ा बुल रन अभी आना बाकी है।

बाजार को नीचे आने के लिए एक घटना की आवश्यकता थी।  साल 2003 में यह गल्फ वॉर थी और 2020 में यह कोरोना वायरस है। साल 2008 में क्यूई 800 अरब डॉलर थी और 2020 में क्यूई 13 लाख करोड़ डॉलर है। अब हर अर्थशास्त्री यह सुझाव दे रहा है कि भारत को भी करेंसी छापनी चाहिए.. अगर सरकार ऐसा कर भी रही है, तो कौन जानता है। हर दूसरी सरकार खपत को प्रोत्साहित करने में व्यस्त है और इससे वैश्विक तरलता बढ़ेगी व इसी से शेयर जमा किये हुए अंदरूनी सूत्रों को होश आया होगा।

प्रवाह का अधिकांश हिस्सा होने के कारण कीमतों को निचले स्तर से ऊपर खींचना आसान था। बाकी उस सिस्टम में सेट किया जाता है जहां वॉल्यूम उत्पन्न होते हैं और स्टॉक 1000 फीसद बढ़ जाता है। यहां ऐसा मछली पकड़ने का जाल है, जहां निवेशक कम मात्रा के साथ कभी भी आधार मूल्य पर निवेश नहीं करते हैं और भारी मात्रा के साथ 1000 फीसद की तेजी से उत्साहित होते हैं। मात्रा बाजार को बड़े रोचक तरीके से चलाती है।

इसकी वास्तव में एक अन्य स्थिति, मई 2014 के पहले से तुलना की जा सकती है। चुनाव से पहले 6000 निफ्टी पर अज्ञात खरीदार थे और उन्होंने वह सब कुछ खरीदा जो उन्हें मिला, जबकि बाजार अधिक से अधिक बिकवाली कर रहा था। अब देखिए कि नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद क्या हुआ.. निफ्टी बढ़कर 9000 हो गया, और खरीदारों की चांदी हो गई। अब आप इसे एसएमएस क्रेडिट ब्लॉकिंग के साथ पढ़ते हैं, जो रिटेल को बाजार में और मार्जिन को कैश सेगमेंट में ट्रेंड करने से रोकेगा। रिटेल का एक्सपोजर कम होगा। कई दलाल आत्मसमर्पण करेंगे।

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