• Sat. Oct 31st, 2020

भाजपा के साथ एकतरफा दोस्ती और जदयू के साथ खुलेआम लड़ाई। चिराग पासवान की राजनीति इन दिनों इन्हीं सवालों से घिरी है। वे पिता रामविलास पासवान को बार-बार याद करते हुए भावुक हो उठते हैं। उनकी नसीहत को दोहराते हैं कि अकेले लड़ने से मत डरना। फिर कहते हैं, हम लोग इस बार अकेले लड़ रहे। चिराग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमलावर हैं। सात निश्चय की आलोचना करते हैं। उनका वादा है कि ‘बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट’ की नीतियों को कार्यान्वित कर बिहार बदलेगा। चिराग से बातचीत के प्रमुख अंश-

– आपको जदयू से इतनी क्या दिक्कत है कि लोजपा को एनडीए से बाहर लेकर चले गए?   

– देखिए, नीतीश कुमार जी ने बिहार को जातपात के नाम पर न सिर्फ बांट दिया है, बल्कि उसे बहुत पीछे धकेल दिया है। मैं मानता हूं कि बिहार में एक ही जाति है। वह है गरीब। नीतीश जी क्यों नहीं इस ‘गरीब जाति’ के दुख दूर कर पाए। उन्होंने पिछड़ा को अतिपिछड़ा बना दिया, दलित को महादलित बना दिया और गरीब को महागरीब बना दिया।

–  एनडीए की सरकार सात निश्चय पर काम कर रही, जिसकी तारीफ तो आप भी करते थे? 

– मैं इसकी ही हकीकत देखने बिहार ‘बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट’ यात्रा पर निकला था। स्पष्ट दिखा कि सात निश्चय फेल है। हम नीतीश जी को फीडबैक देना चाहते थे, लेकिन सुनता कौन है? उसके बाद तो उनसे बात ही नहीं हुई। वह किसी की नहीं सुनते। बाहर के मेरे दोस्त पूछते हैं कि बिहार में गली-नाली पक्की करना क्या इतना बड़ा काम है कि सरकार इसका प्रचार करे। उनके सात निश्चय के जवाब में जनता ने सिर्फ एक निश्चय किया है कि उन्हें हराएगी।

– आप जिस भाजपा के साथ दोस्ती निभा रहे, वही कह रही कि आपको दो-तीन सीटें मिलेंगी? 

– भारतीय जनता पार्टी नीतीश जी को दिया वादा निभा रही है। अमित शाह जी ने घोषणा कर दी थी कि नीतीश जी ही मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। अब जब मुख्यमंत्री जी संकट में हैं, तो भाजपा उन्हें कैसे छोड़ दे? भले ही नीतीश जी की लोकप्रियता खत्म हो गई है, विश्वसनीयता खत्म हो गई है, लेकिन भाजपा अपने वादे पर कायम है। मैं तारीफ कर रहा हूं भाजपा की। वह संकट की इस घड़ी में भी नीतीश जी को छोड़ नहीं रही।

 

– भाजपा तो नरेंद्र मोदी की फोटो तक का इस्तेमाल नहीं करने देना चाहती। 

– मोदी जी की तस्वीर का इस्तेमाल अब मैं नहीं करूंगा। नीतीश जी को करने दीजिए। ज्यादा से ज्यादा करने दीजिए। उन्हें इसकी जरूरत है। वह बार-बार यही करते रहे हैं। महागठबंधन से नाता तोड़कर पिछले दरवाजे से एनडीए में चले आए कि मुख्यमंत्री बने रह सकें। चुनाव बाद बाहर होंगे। प्रधानमंत्री जी मेरे दिल में रहते हैं। मैं उनका हनुमान हूं। आंख मूंदकर उनपर विश्वास करता हूं।

– चुनाव का समय है। सभी विकास की बात करेंगे। आपके पास नया और ठोस क्या है? 

– मेरे पास बिहार के विकास को लेकर हर सवाल का जवाब है। मुझे बहुत दुख है। आज एक मंत्री का निधन हुआ है। मैं उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा हूं। वह कहां भर्ती थे? दिल्ली के मेदांता में। रघुवंश बाबू कहां भर्ती थे? दिल्ली में। बिहार के मंत्री, विधान पार्षद सब इलाज कराने दिल्ली जाते हैं। 15 साल में ढंग का एक अस्पताल भी नहीं बनवा पाए।

– तेजस्वी भी नीतीश कुमार के खिलाफ लड़ रहे। चुनाव बाद क्या दोनों युवा चेहरे साथ आएंगे? 

– ऐसा कभी नहीं होगा। मैं भाजपा के साथ हूं। भाजपा के साथ मिलकर हम सरकार बनाएंगे।

– तो आपके मुताबिक तब मुख्यमंत्री कौन होगा? 

अभी कुछ तय नहीं। कोई भी हो। मुझे आपत्ति नहीं। हां, लोजपा के विधायक उस सरकार में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

– क्या आप अपनी पार्टी से मुख्यमंत्री का चेहरा हैं?   

– नहीं, नहीं…। अभी नहीं। अभी लंबा सफर है।

– अब लोजपा की केंद्र सरकार में भागीदारी नहीं है? आप कहां की राजनीति करेंगे, केंद्र में मंत्री बनेंगे? 

– मैं बिहार में रहूंगा। बिहार की राजनीति करूंगा। मोदी जी को हमारा पूर्ण समर्थन है। लोजपा लंबी छलांग को तैयार है। अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल को लेकर हम लोगों ने कुछ सोचा नहीं है।

– लोजपा की तमाम कमजोरियां रही हैं। आप सभी प्रत्याशी नहीं घोषित कर पाए हैं।

– लोजपा बदल चुकी है। लोजपा अब आत्मनिर्भर है। पापा का भी यही सपना था। वह कहते थे कि अकेले लड़ने से मत डरो। हम लड़ रहे। जीतकर दिखाएंगे। नीतीश जी की तोडफोड़ नीति की वजह से प्रत्याशियों का नाम घोषित नहीं किया, लेकिन सभी प्रत्याशी सिंबल लेकर मैदान में जा चुके हैं।

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