शुक्रवार, 21 मार्च को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 36 पैसे मज़बूत होकर 86 के स्तर पर बंद हुआ। यह रुपये की पिछले दो वर्षों में सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है। विदेशी निवेशकों की मज़बूत खरीदारी और घरेलू शेयर बाज़ार में आई तेजी ने रुपये को समर्थन दिया।
रुपये का उतार-चढ़ाव
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाज़ार में रुपया 86.26 के स्तर पर खुला, दिन के कारोबार के दौरान 85.93 के उच्चतम स्तर को छुआ और 86.30 के निचले स्तर तक गिरा, लेकिन अंत में 86 पर बंद हुआ।
पिछले छह कारोबारी सत्रों में रुपये में कुल 123 पैसे की बढ़त दर्ज हुई है, जो जनवरी 2023 के बाद से सबसे अधिक है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिला समर्थन
रुपये की मजबूती के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर खरीदारी एक बड़ा कारण रही। गुरुवार, 20 मार्च को FII ने भारतीय शेयर बाज़ार में 3,239 करोड़ रुपये के निवेश किए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति जारी रह सकती है, हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये की बढ़त पर दबाव डाल सकती हैं।
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया 85.80 से 86.25 के दायरे में कारोबार कर सकता है।
RBI की FX स्वैप नीलामी को मिलेगा समर्थन
रुपये की मजबूती और हेजिंग लागत में कमी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की आगामी 10 बिलियन डॉलर की फॉरेक्स (FX) स्वैप नीलामी में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकती है। यह स्वैप भारतीय बैंकिंग प्रणाली में रुपये की तरलता को बढ़ाएगा, जिससे कंपनियों को डॉलर एक्सपोज़र हेजिंग का फायदा मिलेगा।
हेजिंग लागत पहले 6.70-6.90 रुपये थी, जो अब घटकर 6.00-6.20 रुपये हो गई है।
ICICI बैंक के ट्रेजरी प्रमुख बी. प्रसन्ना के अनुसार, “वर्तमान में कॉरपोरेट्स के पास रुपये की हेजिंग लागत को लॉक करने का बेहतर अवसर है, क्योंकि यह सीधे रुपये में उधार लेने की लागत से कम है।”
वैश्विक संकेत और शेयर बाजार का प्रदर्शन
अमेरिकी डॉलर सूचकांक 0.19% बढ़कर 104.04 पर पहुंच गया, जबकि ब्रेंट क्रूड 0.29% गिरकर 71.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
घरेलू शेयर बाजार में भी तेजी रही। सेंसेक्स 557 अंकों की बढ़त के साथ 76,905 पर और निफ्टी 160 अंकों की तेजी के साथ 23,350 के स्तर पर बंद हुआ।
