विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाकर 6.3% कर दिया है, जो पहले 6.5% था। इस संशोधन के पीछे मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक कमजोरी और घरेलू नीति की अनिश्चितता को बताया गया है, जो कि मौद्रिक सहजता (Monetary Easing) और विनियामक सुधारों से मिलने वाले लाभों को प्रभावित कर सकते हैं।
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट “दक्षिण एशिया विकास अद्यतन” में कहा कि कर कटौती जैसे कदमों से निजी खपत को प्रोत्साहन मिल सकता है और सार्वजनिक निवेश योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से सरकारी निवेश को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, व्यापार नीति में अचानक किए गए बदलाव और वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की मंदी निर्यात मांग में रुकावट उत्पन्न कर सकते हैं।
यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी हाल ही में व्यापार युद्ध और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए भारत की विकास दर में 20 आधार अंकों की कटौती की है।
विश्व बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावनाएं हैं, लेकिन उसके लिए नीति स्थिरता, वैश्विक मांग में सुधार और घरेलू निवेश में तेजी जरूरी है।
