भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के बाद भले ही युद्ध विराम की घोषणा कर दी गई हो, लेकिन सोशल मीडिया पर गलत सूचना का युद्ध अब भी पूरे जोरों पर जारी है। दोनों देशों के नागरिक इंटरनेट पर एक-दूसरे के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाकर जनमानस को प्रभावित करने की होड़ में लगे हुए हैं।
फेसबुक और x (पूर्व ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म पर अब भी ऐसे वीडियो और तस्वीरें मौजूद हैं जो हमलों को गलत संदर्भ में दिखाते हैं। इन घटनाओं में कम से कम 60 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। एएफपी की तथ्य-जांच टीम ने ऐसे कई वीडियो की सच्चाई उजागर की है, जो असल में इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष या यूक्रेन युद्ध के फुटेज थे, लेकिन इन्हें भारत-पाकिस्तान टकराव के रूप में पेश किया गया।
भारतीय और पाकिस्तानी मीडिया हाउसेज़ ने भी इस गलत सूचना को बढ़ावा दिया है। कई चैनलों और वेबसाइट्स ने फर्जी या अपुष्ट सैन्य सफलताओं का दावा किया है, जिससे विशेषज्ञों के अनुसार तनाव और भी अधिक बढ़ा है और नफरत फैलाने वाले भाषणों की संख्या में उछाल आया है।
संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के पूर्व सैन्य मिशन प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक जनरल डोमिनिक ट्रिनक्वांड का कहना है, “सैन्य तथ्यों को स्थापित करना बेहद कठिन है क्योंकि न सिर्फ घटनाओं की वास्तविकता को साबित करना मुश्किल है, बल्कि एक संचार युद्ध भी लगातार चल रहा है।”
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम शहर के पास हुए एक घातक हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के “आतंकवादी शिविरों” पर घातक हवाई हमले किए। इस हमले में 26 लोगों की जान गई, जिनमें से अधिकांश हिंदू पुरुष थे। भारत ने इस घटना के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया, जबकि पाकिस्तान ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया।
भारतीय हवाई हमलों के तुरंत बाद, पाकिस्तानी सेना ने एक वीडियो साझा किया जो वास्तव में 2023 के गाजा में हुए इज़राइली हवाई हमले का फुटेज था। यह क्लिप जल्द ही टेलीविज़न चैनलों और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, लेकिन बाद में एएफपी समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने इसे फर्जी घोषित किया और हटा लिया।
हालात को और जटिल बनाने का काम किया एआई-जनित (AI-generated) कंटेंट ने। एक वीडियो में पाकिस्तान सेना के एक जनरल को यह कहते हुए दिखाया गया कि देश ने अपने दो विमान खो दिए हैं। जांच में पाया गया कि यह वीडियो 2024 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को एडिट करके तैयार किया गया था।
मिशिगन विश्वविद्यालय के सूचना विद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर जोयोजीत पाल के अनुसार, “डीपफेक तकनीक तक आसान पहुंच के कारण अब हम वीडियो और तस्वीरों दोनों में एआई आधारित फर्जी कंटेंट की नई लहर देख रहे हैं।”
सोशल मीडिया पर साइबर अलर्ट
दोनों देशों ने संकट के समय सूचनात्मक शून्यता का उपयोग करते हुए अपने-अपने नैरेटिव को स्थापित करने का प्रयास किया। एएफपी द्वारा किए गए एक विश्लेषण के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत द्वारा किए गए हमलों के दिन ही एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लगा एक साल पुराना बैन हटा लिया।
पाकिस्तान के डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता उसामा खिलजी ने कहा, “ऐसे संकट के समय में, सरकार को अपने नागरिकों की आवाज़ को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की ज़रूरत होती है, और घरेलू राजनीति के लिए उन्हें चुप कराना सही नहीं है।”
पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (NCERT) ने 8 मई को चेतावनी जारी की कि “ईमेल, सोशल मीडिया, क्यूआर कोड और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से साइबर हमलों और गलत सूचना” में वृद्धि हो रही है।
पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय और कराची पोर्ट ट्रस्ट ने बताया कि उनके एक्स अकाउंट हैक कर लिए गए थे। कराची पोर्ट ट्रस्ट के अकाउंट से एक फर्जी पोस्ट भी की गई, जिसमें दावा किया गया कि भारत ने इस बंदरगाह पर हमला किया है। बाद में यह पोस्ट हटा दी गई और पुष्टि की गई कि ऐसा कोई हमला नहीं हुआ था।
भारत की सोशल मीडिया पर सख्त कार्रवाई
इस बीच, भारत सरकार ने पाकिस्तानी राजनेताओं, मशहूर हस्तियों और मीडिया संगठनों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को निशाना बनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। एक्स को 8,000 से अधिक अकाउंट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया गया, और एक दर्जन से अधिक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध लगाया गया जो “भड़काऊ सामग्री” फैला रहे थे।
सरकार की प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक विंग ने भी संकट से जुड़े 60 से अधिक फर्जी दावों को खंडित किया है, जिनमें से अधिकांश पाकिस्तानी सैन्य जीत के झूठे दावे थे।
नफरत और गलत सूचना का ‘चक्रीय संबंध’
ऑनलाइन गलत सूचनाओं के साथ-साथ जमीन पर नफरत फैलाने वाले भाषणों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। अमेरिका स्थित ‘इंडिया हेट लैब’ की रिपोर्ट में बताया गया कि 22 अप्रैल से 2 मई के बीच 64 व्यक्तिगत नफरत फैलाने वाले भाषण दर्ज किए गए। इन सभी को रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट’ के कार्यकारी निदेशक रकीब हमीद नाइक का कहना है कि “ऑफलाइन नफरत फैलाने वाले भाषणों और ऑनलाइन हानिकारक कंटेंट के बीच एक चक्रीय संबंध है।” उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले के बाद भारत में ऐसी रैलियों में भारी वृद्धि हुई, जहां दक्षिणपंथी नेताओं ने मुस्लिम भारतीयों और कश्मीरियों के खिलाफ हिंसा और घृणा को उकसाया।
सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें हिंदू प्रतीक चिन्हों में लोग मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार की अपील कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में ऐसी कई रैलियों में भड़काऊ भाषण दिए गए।
अब जबकि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की घोषणा हो चुकी है, नाइक ने चेतावनी दी है कि “नफरत फैलाने वाले भाषण एक बार फिर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर केंद्रित होंगे।”
उनका कहना है, “युद्ध की मशीन भले ही रुक गई हो, लेकिन नफरत की मशीन कभी नहीं रुकती। डर है कि यह और ज़्यादा ताकत के साथ वापस आ सकती है।”
