Thursday, May 7, 2026

भारतीय रुपया 19 पैसे की बढ़त के साथ ₹85.49 पर खुला

17 अप्रैल, 2025 को भारतीय रुपये ने लगातार चौथे सत्र में मजबूती दर्ज की। पिछले दिन के ₹85.68 के मुकाबले रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे (0.22%) मजबूत होकर ₹85.49 पर खुला। बीते चार कारोबारी सत्रों में रुपये ने कुल ₹1.2 की बढ़त हासिल की है, जिससे उसकी मासिक गिरावट घटकर केवल 0.06% रह गई है।

रुपये की मजबूती के पीछे प्रमुख कारण

रुपये में आ रही यह मजबूती घरेलू आर्थिक आंकड़ों की सकारात्मकता और वैश्विक निवेश धारणा में बदलाव का परिणाम है। सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक अमित पबारी का कहना है कि अमेरिका द्वारा चीन की आर्थिक वृद्धि को धीमा करने के उद्देश्य से उठाए गए कदमों ने अप्रत्यक्ष रूप से भारत को विदेशी निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बना दिया है। इस रणनीतिक पुनर्संतुलन ने भारतीय बाजारों में पूंजी प्रवाह को तेज किया है, जिससे रुपये को स्थिर समर्थन मिला है।

ब्लैकरॉक के मिडिल ईस्ट और एशिया-पैसिफिक इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट बेन पॉवेल का भी मानना है कि भारतीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड अन्य वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है। यही कारण है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं और अधिक लाभ की तलाश में यहां लगातार पूंजी लगा रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की मजबूत भागीदारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 15 अप्रैल को नौ दिनों की बिकवाली के सिलसिले को तोड़ते हुए ₹6,065.78 करोड़ की घरेलू इक्विटी खरीदी — जो इस वर्ष की तीसरी सबसे बड़ी एकल-दिवसीय खरीद है। इसके अगले दिन यानी 16 अप्रैल को एफआईआई ने ₹3,936.4 करोड़ की अतिरिक्त निवेश राशि भारतीय बाजार में डाली। यह मजबूत निवेश प्रवाह रुपये को स्थिरता देने में एक महत्वपूर्ण कारण रहा है।

वैश्विक मुद्रा और कच्चा तेल बाजार की स्थिति

हालांकि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स — जो प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में डॉलर की मजबूती को दर्शाता है — 0.13% की बढ़त के साथ 99.50 पर पहुंच गया है, लेकिन यह अब भी अप्रैल 2022 के बाद से अपने न्यूनतम स्तर के आसपास बना हुआ है। विश्लेषकों का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों के बाद डॉलर इंडेक्स आने वाले दिनों में 101.50 से 102 की सीमा में थोड़ी और गिरावट दिखा सकता है।

कमोडिटी बाजार की बात करें तो अमेरिका द्वारा ईरान की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने की कोशिशों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 1.17% बढ़कर $66.62 प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.44% बढ़कर $63.37 प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता ने मुद्रास्फीति से जुड़ी चिंताओं को कम किया है, जिससे रुपये को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला है।

आगे की संभावनाएं

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली का मानना है कि निकट भविष्य में रुपया ₹85.40 से ₹85.80 के बीच सीमित रह सकता है। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रुपये की अत्यधिक मजबूती को रोकने के लिए डॉलर खरीदकर बाजार में हस्तक्षेप करने की भी संभावना जताई गई है।

रुपये की यह चार दिवसीय तेजी दर्शाती है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक, एफआईआई का सकारात्मक निवेश रुझान, और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी मिलकर रुपये को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। भारत की आकर्षक सॉवरेन बॉन्ड यील्ड और वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ देश को एक स्थिर और लाभकारी निवेश स्थल बनाती हैं, जिससे आने वाले समय में भी रुपये को मजबूती मिल सकती है।

Latest news
Related news