Sunday, April 12, 2026

सुस्त मांग के बीच चौथी तिमाही में HUL को 2% की मामूली बढ़त

FMG क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने गुरुवार को कहा कि उपभोक्ता सामान क्षेत्र में मांग में सुधार की संभावना है, खासकर शहरी बाजारों में जहां हाल के समय में मंदी देखने को मिली है। कंपनी को उम्मीद है कि सकारात्मक मैक्रोइकनॉमिक संकेतकों के चलते जैसे कि सामान्य मानसून, कर राहत, खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और कम ब्याज दरों के कारण उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी। इससे साबुन, शैंपू, स्टेपल्स और अन्य पैकेज्ड उत्पादों पर खर्च में वृद्धि हो सकती है।

HUL के CEO और M.D. रोहित जावा ने कहा कि उपरोक्त कारकों के चलते ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खपत को बल मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल कंपनी के व्यवसाय पर वैश्विक टैरिफ युद्ध का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं है।

हालांकि शहरी क्षेत्रों में मांग कमजोर रही, फिर भी एचयूएल ने वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही (Q4FY25) में 2% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जिससे इसकी कुल बिक्री 15,000 करोड़ रुपये रही। वहीं, कंपनी का शुद्ध लाभ 4% बढ़कर 2,493 करोड़ रुपये पहुंच गया। जावा ने कहा, “अब मैक्रोइकनॉमिक कारक खपत के पक्ष में आ रहे हैं। यह उपभोक्ता पैकेज्ड वस्तुओं (CPG) उद्योग के लिए एक अच्छा अवसर है।” उन्होंने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही से बेहतर होने की संभावना है।

हालांकि, कंपनी के शेयरों में BSE पर 4% की गिरावट दर्ज की गई और यह 2,325 रुपये पर बंद हुआ। विश्लेषकों ने इस गिरावट के लिए मुनाफे के मार्जिन में गिरावट की आशंका को जिम्मेदार ठहराया। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, HUL 22-23% एबिटा मार्जिन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि पहले यह लक्ष्य 23-24% था।

कंपनी की ऑपरेशनल आय में साल-दर-साल 2.4% की वृद्धि हुई और यह Q4FY25 में 15,214 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।

HUL की आय को भारत में घरेलू खपत का संकेतक माना जाता है। हालांकि, Dove और Knorr जैसे ब्रांड बनाने वाली कंपनी ने कहा कि वह वैश्विक व्यापार तनावों के किसी भी अप्रत्यक्ष प्रभाव को लेकर सतर्क रहेगी। जावा ने कहा, “हम एक कंपनी के रूप में आमतौर पर अलग-थलग हैं। हम स्थानीय मांग के लिए स्थानीय उत्पादन पर केंद्रित हैं, और हमारी आपूर्ति श्रृंखलाएं लचीली हैं। यदि समग्र भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है, तो निश्चित रूप से हम भी उसी असर का हिस्सा होंगे।”

ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, लेकिन शहरी मध्यम वर्ग ने बीते कुछ तिमाहियों में ऊंची मुद्रास्फीति के चलते अपने खर्चों में कटौती की है, जिससे पूरे एफएमसीजी उद्योग की वृद्धि दर पर असर पड़ा है।

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