• 14/08/2022 11:37 pm

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने साल 2019-20 के दौरान एक भी 2,000 रुपये का नोट नहीं छापा है। आरबीआई ने साल 2019-20 की सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में दो हजार के नोटों का प्रसार भी कम हुआ है। आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मार्च 2018 के आखिर तक चलन में आ रहे दो हजार के नोटो की संख्या 33,632 लाख थी। यह संख्या मार्च, 2019 के आखिर तक कम होकर 32,910 लाख पर आ गई। इसके बाद मार्च 2020 के आखिर तक इसमें और गिरावट आई और यह गिरकर 27,398 लाख रह गई।

आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कुल मुद्राओं में दो हजार के नोट की हिस्सेदारी भी कम हुई है। कुल मुद्राओं में दो हजार के नोट की हिस्सेदारी मार्च 2018 के आखिर तक 3.3 फीसद थी। यह मार्च 2019 के आखिर तक तीन फीसद और मार्च 2020 के आखिर तक घटकर 2.4 फीसद रह गया। मूल्य के हिसाब से देखें, तो रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2018 के अंत तक दो हजार के नोट की हिस्सेदारी 37.3 फीसद थी। मार्च 2019 के अंत तक यह 31.2 फीसद और मार्च 2020 के अंत तक यह और घटकर 22.6 फीसद रह गयी।

आरबीआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2018 से तीन साल की अवधि में 200 और 500 रुपये के नोटों का प्रसार तेजी से बढ़ा है। वहीं, साल 2019-20 के बीच बैंक नोटों की आपूर्ति भी घटी है। इसमें एक साल पहले की तुलना में 23.3 फीसद की कमी आई है। इसका मुख्य कारण कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2019-20 में पांच सौ के 1,463 करोड़ नोटों की छपाई का ऑर्डर दिया गया। इसमें से 1,200 करोड़ नोटों की आपूर्ति हुई। वहीं, साल 2018-19 में 1,169 करोड़ नोटों की छपाई के ऑर्डर पर 1,147 करोड़ नोटों की आपूर्ति की गई।

आरबीआई ने रिपोर्ट में बताया है कि साल 2019-20 में कुल 2,96,695 जाली नोट पकड़े गए। इसमें से 4.6 फीसद केंद्रीय बैंक के स्तर पर और 95.4 फीसद जाली नोटों का पता दूसरे बैंकों के स्तर पर लगा। साल 2019-20 में दो हजार के 17,020 जाली नोटों का पता लगा, जबकि साल 2018-19 में 21,847 जाली नोट पकड़े गए थे।

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