Sunday, January 11, 2026

पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 5 आतंकियों के घर किए गए ध्वस्त

पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के कुछ ही दिन बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकियों पर शिकंजा कसते हुए कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार रात को लश्कर-ए-तैयबा (LET) से जुड़े पांच आतंकवादियों के घरों को ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई शोपियां, कुलगाम और पुलवामा जिलों में की गई, जहां सुरक्षा बलों ने लश्कर के गुर्गों और संदिग्धों के खिलाफ तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

शोपियां जिले के चोटीपोरा गांव में लश्कर के कमांडर शाहिद अहमद कुट्टे के घर को गिरा दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, शाहिद पिछले तीन से चार वर्षों से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय था और उस पर राष्ट्र विरोधी अभियानों के समन्वय में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। उसका घर अब मलबे के ढेर में तब्दील हो गया है।

कुलगाम जिले के मटालम इलाके में सक्रिय आतंकी जाहिद अहमद के घर को भी तोड़ दिया गया। पुलवामा जिले में स्थित मुर्रान इलाके में आतंकी अहसान उल हक के घर को विस्फोटक की मदद से ध्वस्त किया गया। जानकारी के अनुसार, अहसान ने वर्ष 2018 में पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण लिया था और हाल ही में वह घाटी में वापस लौट आया था, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई थी।

इसके अलावा लश्कर का एक और आतंकवादी एहसान अहमद शेख, जो जून 2023 से सक्रिय था, उसका दो मंजिला मकान भी गिरा दिया गया। हारिस अहमद, जो पुलवामा के काचीपोरा इलाके का निवासी था, उसका घर भी विस्फोट से उड़ा दिया गया।

सूत्रों ने बताया कि सभी आतंकियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। इससे पहले गुरुवार रात को पहलगाम हमले के पीछे माने जा रहे लश्कर के दो आतंकियों – आदिल हुसैन थोकर और आसिफ शेख – के घर भी विस्फोट में तबाह हो गए। सूत्रों के अनुसार, इन घरों के अंदर पहले से कुछ विस्फोटक सामग्री रखी गई थी।

अनंतनाग पुलिस ने थोकर और अन्य दो संदिग्ध आतंकियों के स्केच भी जारी किए हैं, जो पहलगाम हमले में शामिल थे। इन दो संदिग्धों के नाम हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान और अली भाई उर्फ तल्हा भाई बताए गए हैं, जो पाकिस्तानी नागरिक हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को ₹20 लाख के इनाम की घोषणा की गई है।

मंगलवार को हुए इस घातक हमले ने पूरे देश को हिला दिया। पर्यटकों के लिए प्रसिद्ध बैसरन घाटी – जिसे “मिनी स्विट्जरलैंड” भी कहा जाता है – में आतंकियों के हमले में एक नेपाली नागरिक समेत 26 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही आतंकियों ने गोलियां चलाईं, वहां अफरातफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए भागे, लेकिन खुली जगह में उनके पास छिपने की कोई जगह नहीं थी।

हमले के बाद सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। पूरे इलाके को घेर लिया गया है और संदिग्धों की तलाश जारी है।

भारत सरकार ने भी इस हमले को गंभीरता से लिया है। आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए भारत ने “पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद” का हवाला देते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि पहलगाम हमले में शामिल हर आतंकी और उसके समर्थकों की पहचान कर उन्हें दंडित किया जाएगा।

यह कार्रवाई न सिर्फ आतंकवादियों को सीधा संदेश देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा

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