• 15/08/2022 9:42 pm

#तेल वर्ष 2019-20 के पिछले 11 महीनों में सबसे ज्यादा इंपोर्ट

एसईए ने कहा कि तेल वर्ष 2019-20 के पिछले 11 महीनों में यह सबसे अधिक आयात है. अधिकांश आयात पाम तेल का रहा. इसके आयात की कुल खेप इस साल जुलाई में बढ़कर 8.24 लाख टन हो गयी,

जो एक साल पहले 8.12 लाख टन थी. एसईए ने कहा है कि पाम तेलों में से केवल कच्चा पाम तेल (सीपीओ) और कच्चा पाम गरी तेल (सीपीकेओ) जुलाई में आयात किए गए थे.

इस साल 8 जनवरी से प्रतिबंधित सूची में रखे जाने के बाद आरबीडी पामोलिन के आयात में भारी गिरावट आई है. उसने कहा कि इस साल जुलाई में सोयाबीन का आयात भी बढ़कर 4.84 लाख टन हो गया,

जो पिछले साल के इसी महीने में 3.19 लाख टन था. उक्त अवधि में सूरजमुखी तेल का आयात 2 लाख टन से बढ़कर 2.08 लाख टन हो गया.

एसईए ने कहा कि लॉकडाउन अवधि में, उपभोक्ता पैक में सूरजमुखी और सोयाबीन तेलों के लिए भारी घरेलू मांग थी जो उनके आयात में वृद्धि से स्पष्ट है.

हालांकि, मौजूदा तेल वर्ष के नवंबर 2019 से जुलाई 2020 तक कुल आयात 11 प्रतिशत घटकर 95.69 लाख टन रह गई है जिसका मुख्य कारण आरबीडी पामोलिन के आयात में 82 प्रतिशत की कमी आना है.

तेल वर्ष नवंबर से अक्टूबर तक चलता है. एक अगस्त को, देश भर में विभिन्न बंदरगाहों पर 15.35 लाख टन का स्टॉक पड़ा था, जो एक जुलाई को 10.80 लाख टन से थोड़ा अधिक था.

यह स्टॉक मुख्य रूप से खाद्य तेल के कम आयात के कारण पिछले तीन महीनों में खपने के बाद कम हो गया है.

भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल का आयात करता है और अर्जेंटीना से सोयाबीन तेल सहित कच्चे हल्के तेल की एक थोड़ी मात्रा में आयात करता है.

सूरजमुखी का तेल यूक्रेन और रूस से आयात किया जाता है.

 

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