बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा मुंबई में अपने पूर्व सचिव शशि प्रभु के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। अपने बचपन के दोस्त और लंबे समय से सहयोगी रहे शशि प्रभु को अंतिम श्रद्धांजलि देते हुए अभिनेता बेहद भावुक नजर आए।
रिपोर्ट के मुताबिक, शशि प्रभु का निधन दिल की बीमारी से जूझने के बाद शाम 4 बजे मुंबई के बोरीवली पश्चिम स्थित उनके आवास पर हो गया। हाल ही में उनकी बाईपास सर्जरी भी हुई थी।
गोविंदा के वर्तमान सचिव शशि सिन्हा ने ईटाइम्स से बातचीत के दौरान बताया कि शशि प्रभु सिर्फ गोविंदा के सचिव ही नहीं, बल्कि उनसे कहीं बढ़कर थे। उन्होंने कहा, “वे गोविंदा के बचपन के दोस्त थे। शुरू से ही उनके बीच काफी गहरा रिश्ता था और कई सालों तक उन्होंने गोविंदा के लिए काम भी किया। मैं उन्हें बाद में जान पाया, लेकिन गोविंदा के शुरुआती संघर्षों के दौरान वे उनके लिए भाई जैसे थे। गोविंदा उन्हें सगे भाई की तरह प्यार करते थे और उनका रिश्ता आज भी वैसा ही था।”
शशि प्रभु ने गोविंदा के राजनीतिक करियर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शशि सिन्हा ने पुष्टि की कि गोविंदा की राजनीति में एंट्री के दौरान प्रभु का अहम योगदान रहा, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि गोविंदा के राजनीति में शामिल होने का निर्णय उन्हीं का था।
2004 में रेडिफ को दिए गए एक साक्षात्कार में, शशि प्रभु ने गोविंदा की राजनीतिक यात्रा में अपनी भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा था, “हां, मैं उन्हें सलाह देता था, लेकिन मैं हमेशा जोर देता था कि वे वही करें जो उन्हें सही लगता है। मैं राजनीति में उनसे वरिष्ठ हो सकता हूं, लेकिन वरिष्ठ होना हमेशा बेहतर होने की गारंटी नहीं देता। युवा और नए लोग अपने विचारों के साथ आते हैं। वरिष्ठों के पास अनुभव होता है, लेकिन युवा लोग आज की दुनिया को अधिक समझते हैं।”
गोविंदा द्वारा अपने पूर्व सचिव को दी गई भावनात्मक विदाई उनके अटूट रिश्ते और मजबूत बंधन का प्रमाण है।
